दुनियाभर के देशों का हेल्थ इंडेक्स जारी किया गया है. 188 देशों के हेल्थ इंडेक्स में भारत को 143वें स्थान पर जगह मिली है. हालांकि खुद को तसल्ली देने के लिए आप ये बोल सकते हैं कि हमारा देश हेल्थ के मामले में पाकिस्तान से 6 कदम आगे है.

क्रम तालिका में श्रीलंका (79), चीन (92) और यहां तक की युद्ध की मार झेल रहे सीरिया और इराक जैसे देश भी हमसे आगे हैं. अंदाजा लगाइए कितने बीमार हैं हम…

सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल (सतत विकास लक्ष्य) के आधार पर एक ग्लोबल एनलिसिस पेश किया गया है. बुधवार को यूएन जनरल असेंबली में एक खास इवेंट के दौरान दुनियाभर के देशों का हेल्थ परफॉर्मेंस लॉन्च किया गया. The Lancet ने इस रिपोर्ट को अपने वेब पेज पर प्रकाशित किया है.

एक देश को सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल के स्केल पर शून्य से 100 के बीच अंक दिए जाते हैं. 2015 में आइसलैंड इस सूची में पहले स्थान पर था. आइसलैंड को 100 में से 85 अंक मिले थे. वहीं सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्ल‍िक सबसे पीछे था, जिसे 100 में से 20 अंक मिले थे. 2015 में भारत को 42 अंक मिले थे.

इस लिस्ट में देश के लिए एक बड़ा सवाल जंग जैसी स्थ‍िति में उम्र के मानक के हिसाब से प्रति एक लाख की जनसंख्या में मृत्यु दर भी है. इसमें हिंसा और कानूनी दखलअंदाजी को भी शामिल किया है. इसके लिए इंडेक्स में देश को 93 पॉइंट्स दिए गए हैं. जबकि सीरिया, इराक, लीबिया, पाकिस्तान जैसे देशों को इकाई में रैंक मिली है.

इस रिपोर्ट के आधार पर एक ओर जहां श्रीलंका, इराक, सीरिया, लीबिया जैसे देशों में मलेरिया का सौ फीसदी सफाया हो गया है. वहीं भारत को इस मामले में सिर्फ 10 अंक ही मिले हैं. मिलेनियम डेवलपमेंट गोल में भारत को 100 में 39 अंक मिले हैं. मिलेनियम डेवलपमेंट गोल प्रति हजार लोगों के जन्म पर 42 लोगों की मृत्यु का है. भारत ने इस फ्रंट पर शून्य से 100 के बीच 39 अंक हासिल किए हैं.

साफ-सफाई के मामले में भी हम भारतीय काफी पिछड़े हुए हैं. शून्य से 100 के बीच में भारत को सिर्फ 8 अंक मिले हैं और इसी के साथ भारत अपने ‘पुराने परफॉर्मेंस’ को बरकरार रखे हुए है.

सीनियर रिसर्चर डॉक्टर विक्रम पटेल के मुताबिक, भारत में पब्ल‍िक हेल्थ प्रिंसिपल्स हमेशा से ही नजरअंदाज किए जाते रहे हैं. वो चाहे राजनीतिक स्तर पर हों या फिर मेडिकल लेवल पर.