छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में बारूद के ढेर पर दोरनापाल से जगरगुंडा तक सड़क बनाई जा रही है।  इस जगह को बारूद का ढेर इसलिए कह सकते है कि यहां आए दिन नक्सलिय हमले होते हैं. रहते है। रास्ते में कई बारूद मिलते हैं. ऐसे में यहां सुरक्षा के लिए बल को तैनात किया गया है। यहां महिला कमांडो को भी तैनात किया गया है, जो की सुरक्षा बल के साथ कंधे से कंधा मिला कर नक्सलियों से लोहा लेगी। यह पहली बार है कि महिला कमांडो को नक्सलियों से लोहा लेने के लिए मैदान मे उतारा गया है।

आप को बता दे कि दोरनापाल से जगरगुंडा की सड़क किसी बारूद के ढेर से कम नहीं है. क्योंकि इस मार्ग पर आए दिन आईईडी मिलना और नक्सलिय घटनाएं घटना आम बात है. वर्तमान में पोलमपल्ली गांव मे जो सड़क बनाई जा रही है। गांव से करीब दो किलोमीटर दूर सड़क बनाई जा रही है. जिसकी सुरक्षा की जिम्मेदारी सुरक्षा बल संभाल रहे हैं. लेकिन एक सप्ताह पहले महिला कंमाडो को यहां की सुरक्षा के लिए तैनात किया गया है.

यहां सुरक्षा के लिए पोलमपल्ली कैंप में छोटी बटालियन को भेजा गया है। जिसमें करीब 25 महिलाएं है। पोलमपल्ली कैंप से पहले इन महिला कमांडो को जिला मुख्यालय में तीन माह का प्रशिक्षण दिया गया था। प्रशिक्षण के बाद इन्हें तैनाती के लिए भेजा गया, जहां ये महिलाएं सड़क सुरक्षा के लिए हर दिन हथियार से लैस होकर निकलती है और शाम को वापस कैंप लौटती हैं। वर्तमान में ये महिला कमांडो पुरुष कमांडो के साथ सड़क और थाने की सुरक्षा संभाल रही हैं।

महिला कंमाडो जब पुरी तरह से प्रशिक्षण लेकर नक्सली चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार हो जाएंगी तो इनका उपयोग नक्सल ऑपरेशन के लिए भी किया जाएगा, इससे टीम को महिला नक्सलियों से निपटने में मदद मिलेगी और पुरुष कमांडो के साथ कंधे से कंधा मिलाकर देश की रक्षा करेगी।