नई दिल्ली सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दिपक मिश्रा ने संवैधानिक पीठ बनाई है। पांच जजों की संवैधानिक पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस एके सिकरी, एम खानविल्कर, डी वाई चंद्रचूर्ण और जस्टिस अशोक भूषण शामिल हैं। इस पीठ में वह चारो जज शामिल नहीं है जिन्होने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। प्रेस कॉन्फ्रेंस में जस्टिस जे चेलमेश्वर, रंजन गोगोई, एम बी लोकुर और कुरियन जोसफ ने कहा था की सुप्रीम कोर्ट में सब कुछ ठीक है।

ये संविधानिक पीठ कई अहम मामलो की सुनवाई करेगी जिसमें  आधार कार्ड की अनिवार्यता जैसे मामला और वयस्क समलैंगिकों के बीच सहमति से यौन संबंधों को अपराध की श्रेणी से बाहर रखने के फैसले को चुनौती देने से जुड़े मामलों है।

यह संविधानिक पीठ केरल के सबरीमाला मंदिर में 10 से 50 साल की उम्र की महिलाओें के प्रवेश पर रोक के विवादास्पद मुद्दे पर भी सुनवाई करेगी

यह विवाद शुक्रवार से शुरु हुआ था। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस दिपक मिश्रा के काम करने के तरीके पर सवाल उठाया था और अपनी नाराजगी जाहिर की थी। इन जजों ने अपनी बात मीडिया के सामने रखी थी। इन जजों ने एक चिट्ठी लिखी थी जिसमें उन्होने चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के काम करने के तरीके को मनमाना रवैया बताया था। इन जजों के कहा की आज वो खामोष रहे तो 20 साल बाद उन्हें कोई ये कह दे कि उन्होने अपनी अंतरआत्मा को बेच दिया है।

इस विवाद को सुझाने के लिए कल जज कोर्ट से पहले चाय पर मिले। सभी जज आपस में मिले और अपनी बात रखी। जजों ने आज स्टाफ की गैरमौजूदगी में 15-20 मिनट तक बात की। एक और अहम बात यह है कि सीबीआई के जज लोया जो कि सोहराबुद्दीन एनकाउंटर केस की सुनवाई कर रहै थे की मौत की जांच की मांग की गई है। इस मांग पर आज सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होगी।

इस विवाद का अहम मुद्दा सीबीआई के जज लोया की मौत का था। कल ही अटॉनी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि जजों के बीच उपजा विवाद अब सुलझ गया है।