प्रत्येक अभिभावक का इस समस्या से आमना होता है कि बच्चो की पढ़ाई कहां से शूरू की जाए। इस समस्या का सामाधान आज भी खोजा जा रहा हैं। इसके लिए हम आपकी मदद कर रहे है।

बच्चों को भाषा कालांश में सहज होने दे।

बच्चों का भाषा कालांश में सहज होने का मौका देने पर बच्चे की झिझक मिट जाएगी और बच्चा स्कूल माहौल मे ढ़ल जाएगा। बच्चों को अपनी मात्रभाषा मे बात करने दे व बच्चों को उनकी रूची के अनुसार गतिविधियों मे भाग लेने दिया जाए।

एक-दो सप्ताह तक बच्चों को पढ़ाना शुरू न करें। बच्चों को चित्रों के माध्यम से कहानी सुनाए व कहानी पर चर्चा करने का अवसर दें। उनकी  जिज्ञासा को समझे व उनका जवाब दें।

बच्चों को पेंसिल पकड़ना, किताब और कॉपी खोलना सिखाए ताकि वे इन चीज़ों के साथ सहज हो सकें। प्रत्येक बच्चे की सीखने कि क्षमता में अंतर होता है इसलिए सारे बच्चों से एक जैसी अपेक्षा न रखें। बच्चों को आड़ी-तिरक्षी रेखाओं व गोला बनाने जैसी गतिविधियों करने दें। यह गतिविधियां चौथे-पाँचवे सप्ताह तक जारी रखें।

अब बच्चो को पढ़ना लिखना सिखाने की शुरुआत कर सकते है।

ऐसा करने से बच्चों मे शिक्षा के प्रति रूचि बढ़ती है। बच्चे जब पढ़ व लिख रहै हो तो बारी-बारी से हर बच्चें को देंखें व उसकी कार्य करने मे मदद करें। बच्चों को एक दूसरे की मदद करने के लिए प्रेरित करें।

भाषा शिक्षण की शुरूआत के लिए अगर इन बातों का हम ध्यान रखें तो एक मजबूत नीब डाली जा सकती है। इन बातों से अभिभावक व शिक्षक अपने बच्चों की  शिक्षा कि शुरूआत बड़े सहज व सरल ढंग से कर सकते है ।