उत्तर भारत में दिवाली के बाद छठ पूजा पर जोर दिया जाता है। रांची में एक गावं ऐसा भी है जहां अलग ही टाइप की पूजा होती है। इस गांव का नाम नगड़ी है। यह गांव अलग टाइप की पूजा के लिए बहुत ही मशहूर है। इसका बहुत ही भौकाल है। यहां व्रती नदी या तालाब में अर्घ्य नहीं देते। बल्कि गड्ढे में पूजा होती है। चुआ कहते है उसको।

इसके पीछे यह कारण बताया जाता है। कि पांडव जब जंगल की खाक छान रहे थे तो झारखंड के इसी गांव मे रुके थे। जब उन लोगो को प्यास लगी तो अर्जुन से द्रौपदी ने कहा की पानी का जुगाड़ करो। अर्जुन ने उसी समय अपना तीर निकाला और जमीन पर मारा तो जमीन मे से पानी निकला। द्रौपदी सूरज को इसी पानी के सोर्स के पास अर्घ्य देती थी। कहा जाता है कि महाभारत में जो एकचक्रा नगरी की बात कही गई है यह वही नगरी है।

इसी गांव के थोड़ी दूरी पर हरही गांव हैं। हरही गांव को भीम का ससुराल कहा जाता है।