11 मई 1998 को राजस्थान के पोखरण में तीन बमों के सफल परीक्षण के साथ भारत न्यूक्लियर स्टेट बन गया था. ये देश के लिए गर्व का पल था. इसके 20 साल बाद 25 मई 2018 को पोखरण की कहानी बयां करने वाली हिंदी फिल्म ‘परमाणु: दि स्टोरी ऑफ पोखरण’ रिलीज़ हुई भारत के परमाणु परीक्षण से जुड़े कुछ छोटे-बड़े किस्से. पेश है इसका एक हिस्सा, जो बताता है कि परीक्षण को लेकर अटल बिहारी और नरसिम्हा राव के बीच क्या हुआ था.

 

भारत के परमाणु कार्यक्रम का ज़िक्र होते ही एक विषय दबे पांव चला आता है कि इसका श्रेय किस प्रधानमंत्री के खाते में लिखा जाए. तो इसमें कोई संदेह नहीं हे इसका श्रेय अटल  बिहारी वाजपेयी को ज़्यादा  जाए या पीवी नरसिम्हा राव को दोनों का ही बड़ा योगदान है यह बात हम सब लोग अच्छी तरह जानते है कि मुल्क किसी एक निज़ाम के बूते यहां तक नहीं पहुंचा है. किसी भी प्रधानमंत्री का योगदान और उसकी क्षमता कम-ज़्यादा हो सकती है, पर योगदान  सबका  होता है.

 

प्रधानमंत्री का श्रेय वाला सवाल भी ऐसा ही है. इसका विस्मयादिबोधक चिन्ह वाला जवाब हमें 2004 के अटल बिहारी वाजपेयी से उस समय मिलता हे, जब उन्होंने नरसिम्हा राव के श्रद्धांजलि समारोह में अपना भाषण  दिया था.राव का देहांत 23 दिसंबर 2004 को हुआ था. 9 दिसंबर को उन्हें दिल का दौरा पड़ा था, जिसके बाद 14 दिनों तक वो AIIMS में भर्ती रहे. उनके अंतिम संस्कार से दो दिन बाद रखी गई श्रद्धांजलि सभा में अटल ने कहा, ‘मई 1996 में जब मैंने राव के बाद प्रधानमंत्री की कुर्सी संभाली, तो उन्होंने मुझे बताया था कि बम तैयार है. मैंने तो सिर्फ विस्फोट किया है.’ राव ने अटल से कहा था,