उत्तर प्रदेश के पूर्व सीएम अखिलेश यादव के बंगला विवाद में उत्तर प्रदेश के राज्य संपत्ति विभाग को छोड़कर सबके बयान आ गए हैं. ऐसे में ये साफ नहीं है कि 4 विक्रमादित्य मार्ग के बंगले में हुई तोड़फोड़ से किसके पैसे का नुकसान हुआ है? अखिलेश यादव का या राज्य संपत्ति विभाग का या उत्तर प्रदेश की जनता

फ़िलहाल  इस मामले में सियासत, बयानबाजी और तेज हो चुकी है. अखिलेश-समर्थक उन्हें दूध का धुला बता रहे हैं, और इधर बीजेपी की सरकार उप-चुनाव की हार की खुन्नस निकाल रही है. वहीं लखनऊ में बीजेपी-समर्थक मजबूती से ये पूछ रहे हैं कि क्या अखिलेश के बंगले में सोना गड़ा हुआ था, जिसे निकलवाने के लिए उन्होंने अपने घर में खुदाई कराई. बीजेपी-समर्थक अपने पक्ष में मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह का बयान भी गिनाते हैं, जो उन्होंने 13 जून को दिया था

जब की 7 मई को सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सभी पूर्व-मुख्यमंत्रियों को आदेश दिया कि वो अपना-अपना सरकारी बंगला खाली कर दें. इसके बाद मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव ने राज्य संपत्ति विभाग को पत्र लिखकर बंगला खाली करने के लिए दो साल का वक्त मांगा. संपत्ति विभाग ने न्याय विभाग से सलाह-मशविरा किया और समय देने से इनकार कर दिया. बताया ये भी जा रहा है कि बंगले से जुड़ी रियायत पाने के लिए मुलायम मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से भी मिले थे, लेकिन कालिदास मार्ग से उन्हें कोई मदद नहीं मिली. मुलायम सिंह यादव ने अपना बंगला 2 जून को छोड़ा और अखिलेश यादव ने 3 जून को. लेकिन, अखिलेश ने इस बंगले की चाबी 9 जून को संपत्ति विभाग को सौंपी. इसी के बाद से उनके बंगले में हुई तोड़फोड़ की तस्वीरें और वीडियो मीडिया और सोशल मीडिया पर आना शुरू हुए. कहा गया कि अखिलेश ने बंगला छोड़ते हुए उसे तहस-नहस कर दिया, वहां लगी कई चीज़ें उखाड़ ले गए. AC की फिलिंग, बंगले की टाइल्स, बिजली के बोर्ड और स्विच, टोंटियां, साइकिल ट्रैक, गार्डेन की कुर्सी-बेंच, बैडमिंटन कोर्ट, जिम का सामान और विदेशी पौधे. आरोप ये भी लगे कि अखिलेश ने बंगले में मौजूद स्विमिंग पूल को मिट्टी से पटवा दिया.  घर में संगमरमर का जो मंदिर बना था, वो अब भी जस का तस वहीं है|

सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करते हुए सबसे पहले राजनाथ सिंह ने बंगला छोड़ा. उन्होंने मई में ही बंगला खाली कर दिया था.और फिर बाद में  तेवर दिखाने के बाद मायावती ने भी अपने बंगले की चाबियां संपत्ति विभाग को सौंप दीं. कल्याण सिंह ने भी अपना सरकारी बंगला खाली किया. चूंकि नारायण दत्त तिवारी अभी अस्पताल में भर्ती हैं और उनकी पत्नी भी बीमार हैं, तो उन्होंने बंगला खाली करने के लिए और वक्त मांगा है. मानवीय आधार पर उन पर कोई ज़ोर नहीं डाला गया, लेकिन आधिकारिक रूप से उन्हें अभी तक कोई मियाद भी नहीं दी गई है.