नीतीश बाबू के बिहार में , एक अलग ही घटना सामने आई आज तक हम सब ने यह सुना होगा की चूहा जैसा विरक्त जीव ब्रह्मांड में दूसरा नहीं हो सकता. जैसे लकड़ी काटता है, वैसे ही कपड़े कुतरता है. जैसे सूखी रोटी खाता है, वैसे ही (नीतीश बाबू के बिहार में) हजारों की शराब पी जाता है. अब इस प्रजाति का एक नया कारनामा सामने आया है. असम के तिनसुकिया में. SBI के एक एटीएम के अंदर रखे करीब 12 लाख रुपयों को चूहों ने कुतर डाला. चिंदी-चिंदी कर दिया. अब सोचने वाली बात यह हे कि चूहे एटीएम मशीन में आए कहा से |
इन कुतरे गए नोटों में . दो हजार रुपये के गुलाबी कागज तार-तार होकर पड़े हैं. बीच में कई 500 के नोटों की कुतरन भी पड़ी है. ये ATM लाइपुली इलाके में था. 20 तारीख से ही बंद था. कुछ तकनीकी परेशानी के कारण इसे बंद किया गया था. ATM के गेट पर ताला लटका दिया गया था. लेकिन किसे मालूम था कि बंद ताले के पीछे चूहे नोटों की चिंदी-चिंदी कर रहे है 11 जून को बैंक के रिपेयरमैन ATM की बिगड़ी मशीन ठीक करने आए. वहां उन्हें 500 और 2000 रुपयों के कुतरे नोटों का ढेर मिला.तो उनकी आखे खुली कि खुली रह गई | जब नोटों के काटने कि खबर बैंक को मिली, तो उसने हिसाब जोड़ा. तो पता चला कि 19 मई को उस ATM के अंदर 29 लाख रुपये डाले गए थे. अगले ही दिन मशीन खराब हो गई और ATM बंद हो गया. जो रुपये थे, उसमें से 12,38,000 रुपया चूहों ने कुतर दिया. बाकी 17 लाख रुपया बैंक ने बचा लिया.
अब सवाल यह हे कि जो कहा जा रहा है, क्या सच में वैसा ही हुआ? या फिर बेचारे चूहों के नाम पर कोई और ही खेल खेल रहा है ? तिनसुकिया पुलिस के पास इस घटना की शिकायत दर्ज की गई है. 20 मई को ATM खराब हुआ. बैंकवालों ने 11 जून को उसकी मरम्मत के लिए लोग भेजे. इतने दिनों बाद जाकर बैंक को ATM ठीक करवाने की सुध आई? क्या ये देरी जान-बूझकर की गई? और इल्जाम बेचारे चूहों पर लगाया जा रहा है? लेकिन सोचने वाली बात यह भी हे कि जब 20 मई को मशीन खराब हो गई थी तो मरम्मत के लिए 11 जून को एटीएम ठीक करने के लिए टीम को भेजा इतने दिन बैंक वाले हाथ पर हाथ रख कर ऐसे ही क्यों बैठे रहे |