बागेश्वर – रोजगार की खातिर गांव से शहर की ओर पलायन एकमात्र विकल्प नहीं है, गांव में रह कर भी आप एक अच्छा व्यापार कर सकते है उत्तराखंड के बागेश्वर जिले के मुनार गांव के लोगों ने अपनी जीवटता से इस बात को साबित किया है। मडुवा, मक्का, चौलाई जैसी फसलों को ग्रामीणों ने आगे बढ़ने का आधार बनाया। स्वयं सहायक समूह बनाकर मडुवे से बिस्किट बनाने की फैक्ट्री लगाई। पौष्टिकता और स्वाद से भरपूर यह बिस्किट जिले के लिए बड़ी सौगात हैं तो कुमाऊं के लिए बेहतरीन जायका।

मुनार गांव बागेश्वर जिले में कपकोट के भौगोलिक हालात के लिहाज से देखा जाए तो काफी  दुर्गम है। यहां सिर्फ कृषि और पशुपालन ही लोगो की  आजीविका का माध्यम है। एक दशक पहले ग्रामीणों ने स्वयं सहायता समूह बनाया और ठाना कि मडुवा, चौलाई, मक्के के बिस्किट बनाकर बाजार में बेचेंगे। 50 हजार रुपये से शुरूआत की और हाथों से बिस्किट बना कर बिना पैकिंग कपकोट, भराड़ी बाजार में बेचा।इसके बाद डेढ़ लाख रुपये जमा कर बिस्किट तैयार करने और पैकिंग के लिए यूनिट लगाई। ब्रांड नेम भी है और बागेश्वर जिले के 36 आंगनबाड़ी केंद्रों के साथ ही समूह ने अपने आउटलेट भी खोल लिए हैं। पौष्टिकता से भरपूर इस बिस्किट की डिमांड बढ़ती जा रही है। 10 महीने पहले सरकार की एकीकृत आजीविका सहयोग परियोजना के तहत मां चिल्ठा आजीविका स्वायत्त सहकारिता का गठन किया गया, जिसके तहत 20 गांवों में 84 स्वयं सहायता समूह बनाए गए है, जिसमें 984 सदस्य जुड़े हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 29 अप्रैल को मन की बात में मुनार गांव की इस कामयाबी और संघर्ष को सराहा है। पीएम ने कहा था, ‘उत्तराखंड के किसान देश भर के किसानों के लिए प्रेरणास्नोत बन गए हैं। उन्होंने संगठित प्रयास से काम किया। सहकारी संस्था बनाई और बिस्किट की फैक्ट्री खोल ली है। सरकार ने भी इसे राष्ट्रीय आजीविका मिशन से जोड़ दिया है। वाकई में यह प्रयास सराहनीय है।